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Tuesday, 18 February 2014

गाजर

गाजर के गुणों का मुकाबला शायद ही कोई अन्य सब्जी कर सकती है। इसे सलाद के रूप में कच्चा भी खाया जा सकता है, पका कर इसकी सब्जी भी बनाई जा सकती है तथा रस निकाल कर इसका जूस भी पिया जा सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार गाजर एक फल अथवा सब्जी ही नहीं, अपितु रक्तपित्त तथा कफ को नष्ट करने वाली मीठी, रस से भरी, पेट की अग्नि को बढ़ाने वाली तथा बवासीर जैसे रोग को रोकने वाली जड़ी-बूटी भी है।

गाजर हृदय संबंधी बीमारियों में भी बहुत लाभकारी होती है। यह वीर्य विकार नष्ट करती है तथा शारीरिक कमजोरी में लाभप्रद है।

चूँकि इसमें रक्त अवरोधक शक्ति होती है इसलिए यह रक्तपित्त को बनने नहीं देती।

वैसे इसकी तासीर ठंडी होती है लेकिन यह कफनाशक है। गाजर लौंग तथा अदरक की ही तरह छाती तथा गले में जमे कफ को पिघलाकर निकालने में सक्षम है।

गाजर में कुछ इस प्रकार के खनिज लवण पाए जाते हैं। जो शक्ति को बढ़ाने तथा रोगों को रोकने में बहुत ही आवश्यक होते हैं। शरीर के भीतर ये लवण खून में मिलकर विकार पनपने से रोकते हैं तथा प्रत्येक तंतु एवं प्रत्येक ग्रंथि को स्वस्थ रखते हैं।

Saturday, 11 January 2014

गाजर

गाजर
गाजर

गाजर गुणों का खजाना है। गाजर को विटामिन व न्यूट्रिशंस से भरपूर माना गया है। इसमें मिनरल्स बहुत मात्रा में मिलते हैं। गाजर को आंखों के लिए बहुत अधिक फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह विटामिन 'ए' का सबसे अच्छा स्त्रोत है। लेकिन गाजर सिर्फ आंखों के लिए ही लाभदायक नहीं है बल्कि इसके अलावा भी गाजर के सही तरीके से सेवन के अनेक फायदे हैं आइए हम बताते हैं आपको गाजर के कुछ ऐसे ही आसान प्रयोग....

- गाजर के रस का रोज सेवन करने से दिमागी कमजोरी दूर होती है।

- गाजर के रस अथवा उबली हुई गाजर पर रहने से मरीज को लाभ होता है।

- मासिक कम आने पर या समय होने पर भी न आने पर गाजर के 5 ग्राम बीजों को 20 ग्राम गुड़ के साथ काढ़ा बनाकर लेने से लाभ होता है।

-गाजर के पत्तों पर दोनों ओर घी लगाकर उन्हें गर्म करें। फिर उनका रस निकालकर 2-3 बूँदें गाम एवं नाक में डालें। इससे आधासीसी का दर्द मिटता है।

- आंखों में किसी भी तरह का रोग होने पर कच्ची गाजर या उसके रस का रोजाना सेवन लाभप्रद है। यह प्रयोग चश्मे का नंबर घटा सकता है।

- गाजर का रस पीने से पेशाब खुलकर आता है, रक्तशर्करा भी कम होती है। गाजर का हलवा खाने से पेशाब में कैल्शियम, फास्फोरस का आना बंद हो जाता है।

- जल जाने पर भी प्रभावित अंग पर बार-बार गाजर का रस लगाने से लाभ होता है।

- गाजर को कद्दूकस करके नमक मिलाकर खाने से खाज-खुजली में फायदा होता है।

- गाजर के रस में नमक, घनिया पत्ती, जीरा, काली मिर्च, नीबू का रस डालकर पीने से पाचन संबंघी गड़बड़ी दूर होती है।

- ह्दय की कमजोरी अथवा घड़कनें बढ़ जाने पर गाजर को भूनकर खाने पर लाभ होता है